प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।

सादर समीक्षार्थ,
पञ्चचामर छंद (श्रीराम)
(121 212 121 212 121 2)

प्रभा-प्रवाह धाम में दिगंत-दिव्य-गान है।
सुधा मयूख-रेख में सजी सुरम्य शान है॥
प्रसून-वृष्टि-व्योम से सुमोद का वितान है।
निनाद-नाद-बाल-रूप में प्रफुल्ल मान है॥

पिनाक-भंग-नाद से दिगंत गूँजमान है।
सिया विवाह राम संग शुभ्रता-विधान है॥
विदेह-धाम-मध्य में प्रमोद-पूर्ण स्थान है।
विवाह सर्व भ्रात से छटा अनूप शान है॥

निषाद-राज राम संग मित्रता प्रधान है।
निषाद के विनीत भाव प्रेम का निधान है॥
बिठाय पाँव को पखार नाव देव स्थान है।
अरण्य दण्डका वनांत भक्ति का विधान है॥

– प्रत्यूष गौतम