अवध में आज आएंगे रघुराई
भरत जी कर रहे अगुवाई।
पीछे आती तीनों माताएं, और
खुशी से उनकी आंखें भर आई।
अवध में आएंगे ——
प्रजाजन सब पीछे आए।
सुहागिनों ने मंगल गाए।
घरों में बंदनवार सजाए।
सबके मन मुदित हो आए।
अवध में आएंगे ——-
जाने क्या सोचेंगे रामजी,
क्या सोचेंगे लक्ष्मण भाई।
जब देखेंगे उर्मिला मां की
फीका चेहरा और आंखें पथराई।
अवध में आएंगे आज रघुराई।–
मेरे ही कारण उन पर विपदा आई।
तूने क्यों जाया मुझे माई।
सुरति करते श्री राम की
भरत जी की आंखें भर भर आई।
तभी ढोल नगाड़े बजते देखें।
आकाश से फूल बरसते देखे।
मंगल गान जब बजते देखें
तो लखे सामने रघुराई।
अवध में आज लौट आए रघुराई।
खुशियों ने साक्षात रूप बनाया।
रघुराई जी ने भरत को गले लगाया।
गुरुओं और माता के छूकर पैर
सब से मिले रघुराई।
अयोध्या में भारत मिलाप का शुभ दिन आया।
सबका मन था हर्षाया।
राम लखन भरत शत्रुघ्न और माता सीता ने दरबार लगाया।
हनुमत जी को भी राम जी ने
दरबार में ही था बिठाया।
अवध में खुशियों का दिन आया।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा
