आदर्श बना लो श्रीराम को,लहू बहाने वालों।
निज गुमान की खातिर,मानवता मिटाने वालों।।
वक्त राज्याभिषेक के,वनवास का संदेश हुआ।
बिन विचलित हुए राम ने,वन पथ अपना लिया।।
मान पिता का रखने को,सिंहासन ठुकरा दिया।
नमन ऐसे पुत्र को,मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया।।
कर विनती जलद से,परिचय विनम्रता का दिया।
अमन चैन के बन रक्षक,अंगद दूत बना दिया।।
शरणागत रक्षक राम,विभीषण को अपना लिया।
बहुतेरे कष्ट सहन कर, श्रीलंका फतह किया।।
ना थे विस्तारवादी,विभीषण राजा बना दिया।
सबक लेलो श्रीराम से,परमाणु बम्ब चलाने वालों।
आदर्श बना लो श्रीराम को, लहू बहाने वालों।।
निज गुमान की खातिर,मानवता मिटाने वालों।।
