*प्रकटे राम अवधपुर फिर से,*
(मापनी 32,यति 16,16पर)
हर्षित आज सभी नर-नारी।
काल-पुरुष की है बलिहारी।।
सरयू भी आह्लादित भारी।
धन्य राम की सब महतारी।।
स्वस्ति-वचन गूँजें हर गिरि से।
प्रकटे राम अवधपुर फिर से।।
अहंकार का रावण आया।
असुर-भाव का तंत्र रचाया।।
जन्म-भूमि का मन हर्षाया।
पूर्ण मिटी बाबर की छाया।।
हर्ष-निनाद गूँजता स्वर से।
प्रकटे राम अवधपुर फिर से।।
फिर साकार हुआ युग त्रेता।
नौका काल-पुरुष की खेता।।
रूप राम का सुख है देता।
काल बलैया हँस कर लेता।।
मन-उपवन सबके ही सिरसे।
प्रकटे राम अवधपुर फिर से।।
जन-मन में है खुशियाँ छाई।
हर्षा गगन धरा मुस्काई।
सबने अनुपम सुख पाया है।
राम-काल फिर से आया है।।
पशु-पक्षी भी लगते हरषे।
प्रगटे राम अवधपुर फिर से।।
राज किशोर वाजपेयी “अभय”
ग्वालियर
मोबाइल:9425003616
