तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है

*राम गीत*
तेरे अंदर राम बाहर राम, राम राम में राम है
राम नाम से ही मिलता उनके, चरणों में मुक्ति धाम है।

जग में आकर जीवन में तूने,क्या खोया क्या पाया है
देख के दुनिया की चकाचौंध तू,जीवन भर भरमाया है
अपना नहीं है कुछ भी यहांँ पर, झूठे जगत के काम हैं।
राम नाम ————-

उल्टा भजले सीधा भजले,काम तेरे ही आना है
नहीं भजेगा तो दुनिया में फिर,तुझको आना जाना है
भजले राम नाम को मन से, लगते ना इसमें दाम है।
राम नाम ————-

समय का घोड़ा जाए दौड़ा, कहांँ पे तेरा ध्यान रे
भवसागर से पार लगा ले तू, नैया अपनी पार रे
प्रभु नाम का ले ले सहारा, जग में उसी का नाम है।
राम नाम —————-
कवि गीतकार श्रीपाल शर्मा ‘ईदरीशपुरी’ बागपत उ०प्र०
8171963528