आधार छंद – दुर्मिल/श्रीपद सवैया

आधार छंद – *दुर्मिल/श्रीपद सवैया*

यशवान बने मुख राम कहे नित ध्यान सदा गुणगान करे।
सिय राम प्रकाश भरे उर में तब होत कृपा मन ध्यान धरे।।
प्रभु आप दयानिधि सागर हो रखलो अब लाज सुजान हरे ।।
इस जीवन के तुम राम सदा हृदय में सबके हनुमान धरे।।


रघुनंदन नाम सदा शुभ पालन श्री तुम ही भयनाशन हो ।
हरि राघव वीर सुवीर कहे तुम दारुण ज्ञान प्रकाशन हो।।
भव सागर पार उतार रहें तुम राम प्रजापति तारन हो।
अब धीरज भी मुख मोड़ रहा बस नाम धरो मुख पावन हो।।


भज नाम रमापति श्री रघुवीर सदा तब सुंदर धाम मिले।
मनमोहक रूप दया निधि का जिसकी किरपा अविराम मिले।।
जिसकी दुखदा पल में हरते सब काज करे सुख राम मिले।
इस जीवन में सबके भव बंधन काट सदा शुभ धाम मिले।।

रेणु मिश्रा रतन🙏