जिव्या पर बस राम हो , “निर्मल” मन में राम ।

जिव्या पर बस राम हो , “निर्मल” मन में राम ।
कानों में गूंजे सदा , दो अक्षर का नाम ।।
श्री राम आदर्श हैं , समरसता प्रतिमान ।
राम मंदिर बन गया ,सजा अयोध्या धाम ।।
जन्म सफल सबका हुआ ,प्रभु के दर्शन पाइ ।
भक्त सभी स्वागत करें ,देव सुमन बरसाइ ।।
हर घर आंगन देहरी ,जलते दीप अशंख ।
ढोल मंजीरा ढाल ढप,बजते झालर शंख ।।
वर्षों के बनवास से ,आए अयोध्या धाम ।
भक्तों के उद्धार को ,लक्ष्मण सीता राम ।।

“निर्मल” भाव की विनती ,प्रभु स्वीकार हो जाए। फसी मझधार में नैया, मेरी भी पार हो जाए।।
कृपा करदो श्री रघुवर ,सहारा तुम ही हो मेरे ।
कृपा की दृष्टि थोड़ी सी, मेरा उद्धार हो जाए ।।
जय श्री राम…

आचार्य निर्मल
(कवि एवं साहित्यकार)
मथुरा उ० प्र०
9258812772