कलंकित हुई मां सीता जब दोष राम पर डाला गया
एक धोबी के कहने पर क्यों सीता को घर से निकाला गया
सभी मांग रहे थे उत्तर प्रश्न खुद बने थे राम
जानते थे पवित्रता सीता की फिर भी चुप खड़े थे राम
आने वाली पीढ़ी को उन्हे राजधर्म सिखलाना था
राम सह गए हर दुख
क्योंकि राम को राम का फर्ज निभाना था।
किशोर राम ने छोड़ दिया घर मुनियों के दुख हरने को
चल दिए वो कौशिक के संग यज्ञ रखवाली करने को
होंठों की मुस्कान वही थी वही रूप था मतवाला
राजगद्दी का वादा करके जब वन जाने को कह डाला
मां कैकेई की कुचाल तो केवल एक बहाना था
राम सह गए हर दुख
क्योंकि राम को राम का फर्ज निभाना था।
अंत समय में पिता के जो दर्शन तक ना कर पाया
ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते चिता शीश ना धर पाया
वन में संकट सहते हुए जिसने भार्या खो दी हो
जिसके कठिन जीवन पर खुद नियति भी रो दी हो
राम को लेकिन फिर भी हरदम मंद मंद मुस्काना था
राम सह गए हर दुख
क्योंकि राम को राम का फर्ज निभाना था।
जिसको न मालूम पड़ा अपने बच्चों का नाम पता
जिसने भुगती हर सजा बिना किए ही कोई खता
जिसका जीवन आधारित था आदर्शों पर सच्चाई पर
समर्पित था जो केवल मानवता की भलाई पर
केवल भक्तों की खातिर ही उन्हे धरा पर आना था
राम सह गए हर दुख
क्योंकि राम को राम का फर्ज निभाना था।
क्यों फिर वो राम सीता का साथ अंत तक निभा ना सके
सीता साथ चली थी उनके वो क्यों संग में जा ना सके
प्रजा का संदेह हटाया खुद जरा ना शंकित हुए थे राम
कलंक हटाकर सीता का खुद कलंकित हुए थे राम
राम का दोष नही था कुछ भी दोषी तो ये जमाना था
राम सह गए हर दुख
क्योंकि राम को राम का फर्ज निभाना था।
मौलिक एवं स्वरचित
विवेक ऐरन
