जिनके सुमिरन से खुल जाते स्वयं मुक्ति के सारे धाम।

जिनके सुमिरन से खुल जाते स्वयं मुक्ति के सारे धाम।
वो हैं प्राणन प्यारे राम जय श्री राम जय श्री राम।

कौशल्या की आंख तारे,
दशरथ के हैं राज दुलारे,
ताड़का मार अजामिल तारे,
सुर नर मुनि जन के रखवारे,
पत्थर तैर गए पानी में छूकर जिनका नाम-
वो हैं —–

मेरी सांसों में धड़कन में,
मेरे अंतस के आंगन में,
श्रद्धा होम हवन पूजन में,
राम सिवा क्या है जीवन में,
उन चरणन में सदा समर्पित मेरी भक्ति है निष्काम –
वो हैं —–

सुखदायक संताप विनाशक,
मानवता के दर्शन नायक,
दानवता के हैं संहारक,
देव दनुज सबके वो तारक,
जनम मरण के क्रम को मिलता जिनके चरणन में विश्राम —
वो हैं
राम रसायन की मधुशाला,
न कोई साकी न कोई प्याला,
राम नाम रस अव्वल आला,
तर जाता है पीने वाला,
सोनम एक बूंद जो चखले वो पा जाएगा आराम —–
वो हैं —