हे राम हमारे आ जाओ।

हे राम हमारे आ जाओ।
प्रभु राम हमारे आ जाओ।

सरयू जी राह निहारे है
गंगा भी तुम्हें पुकारे है
है साधु संत सब ये कहते
हैं राम नाम रटते रहते।

सब भक्त पुकारे आ जाओ।
हे राम हमारे आ जाओ ।

हे अवधपुरी के रघुनंदन
हे राम लखन लेने चंदन
तुम चित्रकूट में आए थे
जब तुलसी तुम्हें बुलाए थे।

भव पार लगाने आ जाओ।
हे राम हमारे आ जाओ।

शबरी से मीठे बेर नहीं
पर करेंगे कोई देर नहीं
जो कंद मूल हो लायेंगे
अपने हाथों हीं पवाएंगे।

ये भोग लगाने आ जाओ।
हे राम हमारे आ जाओ।

मां जनक दुलारी संग लिए
जीवन का कोई रंग लिए
बस ज्ञान हमें ये हो जाए
बस भान हमे ये हो जाए।

कर जोड़ गुहारें आ जाओ।
हे राम हमारे आ जाओ।

हनुमान तुम्हें तो प्यारे हैं
उनको भी पत्रिका डारे हैं
श्री रामनाम का डंका जो
ले नाम जलाया लंका को।

हम तुम्हे पुकारे आ जाओ।
हे राम हमारे आ जाओ ।
✍️श्रीराम तिवारी सहज
आरा बिहार