राम स्तुति – (है राम तुम्हारी कृपा)
है राम तुम्हारी कृपा, के तुम फिर धाम आए हो
यह जन्म हुआ था वृथा, के तन में प्राण लाए हो ।
है राम तुम्हारी कृपा, के……………………
सरयु पुलकित होवे तट खुलें, अयोध्या नव दुल्हन सी लगे
तुम आकर जब संतन से मिले, प्रभु अमृत बरसाए हो ।
है राम तुम्हारी कृपा, के……………………
जगत में छाया सकल बसंत, हुआ अब सब क्लेशों का अंत
नयन को दिए जो तुमने दर्श, जमीं को स्वर्ग बनाए हो ।
है राम तुम्हारी कृपा, के……………………
सुर-नर-मुनि हैं आत्मविभोर, ना कोई भरम ना कोई क्षोभ
देव बरसावें पुष्प चहुंओर, मधुर रसपान कराये हो ।
है राम तुम्हारी कृपा, के……………………
गौमाता डोलें बछड़ों संग, मयूरें नाचें फैलावें पंख
सूर्य का थमा हो जैसे चक्र, राममयी सृष्टि रचाए हो।
है राम तुम्हारी कृपा, के……………………
हमने जब जन्म लिए अनेक, तो आया है यह शुभदिन एक
प्रभु तुम करुणामय हो राम, हमारा मन हर्षाय हो।
है राम तुम्हारी कृपा, के तुम फिर धाम आए हो
यह जन्म हुआ था वृथा, के तन में प्राण लाए हो ।
है राम तुम्हारी कृपा, के……………………
-अनिल कपूर,गाजियाबाद
