राम नाम रोज लेना जरूर पिया,
होइएं दुख दूर पिया ना।।
यनकै नाम केतना खास,
ई लिखे हैं तुलसीदास।
रोम-रोम जेकै भक्ति रस मा चूर पिया।
कई सके न क्यो बखान,
जेकै भक्त हनुमान।
अंग अंग मा रमावै जे सेनूर पिया।।
पाथर छुए तरि जाए,
सेतु जल मा लहराए।
सब रतनम बाटे राम कोहिनूर पिया।।
रोज सांझे औ सबेरे,
राम नाम सब ही टेरे।
लैके फूल माला अक्षत कपूर पिया।।
यक दिन भाग जागि जैइहैं,
राम घरवा मोरे अइहैं।
मनवा नाचे जइसे नाचत थ मयूर पिया।।
अर्चना द्विवेदी
अयोध्या उत्तरप्रदेश
